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| <p> Folio no 325r is not in sequence and also repeated/ | <p> Folio no 325r is not in sequence and also repeated/ | ||
| - | So, I have transcribed folio 326r, which is the same and | + | So, I have transcribed folio 327r (dscn3304 fol 326.jpg, lower), |
| - | | + | |
| < | < | ||
| don’t understand where to add except one. </p> | don’t understand where to add except one. </p> | ||
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| + | <note resp=" | ||
| + | 35.3ab are repeated and given after 3.40</ | ||
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| + | 54cd, 55, 58cd, 78cd, 79-83, 84cd, 85ab</ | ||
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| - | | + | iṅgitajño ma<g ref="#newa-old-gap-filler"/>< |
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| - | vāṣpeṇorddhvamudīryatāṃ |</l> | + | |
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| - | tatra tasyāñjane kuṣṭhaṃ lāmajjannaladaṃ madhū<unclear> | + | tatra tasyāñjane kuṣṭhaṃ lāmajjan naladaṃ madhū<del resp=" |
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| - | tatra pralepaḥ śyāmendragopasomotpalāni ca |</l> | + | tatra pralepaḥ śyāmendra< |
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| - | tatosyāṣṭhīla< | + | tato syāṣṭhīla< |
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| - | tatra vāṣperitaṃ karma yaccā<lb n=" | + | tatra vāṣperitaṃ karma yac < |
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| dantakāṣṭhagate viṣe | | dantakāṣṭhagate viṣe | | ||
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| - | candanantagaraṃ kuṣṭhamuśīraṃ veṇupatrikā |</l> | + | candanan tagaraṃ kuṣṭham uśīraṃ veṇupatrikā |</l> |
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| + | dscn 3303 fol 325jpg upper (scribal 325v). --> | ||
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| raso mūṣikakarṇṇyā vā dhūmo vāgārasaṃjñitaḥ |</l> | raso mūṣikakarṇṇyā vā dhūmo vāgārasaṃjñitaḥ |</l> | ||
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| + | <l xml: | ||
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| + | tāni praduṣṭāni bhiṣag vipaścid | ||
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| + | tad bhasma śītam vikiret sarassu ||</ | ||
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| + | tad āśu śūyaty atha da< | ||
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| + | <add place=" | ||
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| + | <l xml: | ||
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| + | <!-- folio 333r is correct; check other foliation numbering in this file. --> | ||
| + | <l xml: | ||
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| + | <l xml: | ||
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| + | <l xml: | ||
| + | vahuvātakapham viṣaṃ | | ||
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| + | |||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
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| + | tad dhi sthānañ cetanāyāḥ svabhāvād vyāpya tiṣṭhati ||</ | ||
| + | |||
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| + | <!-- DW: 5.3.35.1 and 3.35.1 are repeated here: --> | ||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | < | ||
| + | nā sāvasādaś ca sakaṇṭhabhaṅgāḥ |</l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | < | ||
| + | hanvo sthiratvaṃ sa vivarjjanīyaḥ || | ||
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| + | |||
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| + | ye tu daṃṣṭrāviṣā bhaumā ye daśanti ca mānavān ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | < | ||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tathaiva paruṣatvacaḥ | | ||
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| + | |||
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| + | < | ||
| + | mahāsarppaḥ | śaṃkhapālo lohitā< | ||
| + | khaṇḍaphaṇaḥ ku< | ||
| + | ma< | ||
| + | vicitra puṣpābhikīrṇṇā< | ||
| + | mahāśīrṣālagardda< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | raktamaṇḍalaḥ pṛṣato devadi< | ||
| + | vṛddhagonasaḥ | panasako mahāpanasakaḥ | veṇupatrakaḥ śiśuko madanakaḥ | | ||
| + | pālindakaḥ | tantukaḥ puṣpapāṇḍuḥ ṣaḍaṅgo gniko vabhru kaṣāyaḥ khaluṣaḥ | ||
| + | pārāvato ha<pb n=" | ||
| + | eṇīpadaś ceti | </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | aṅgulirājiḥ | dvyaṅgulirājiḥ | vindurājiḥ | karddamas tṛṇaśoṣa< | ||
| + | | svetahanur ddarvbhapuṣpo lohitākṣaś ca< | ||
| + | > | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | ' | ||
| + | | puṣpasakalī jyotī< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tad yathā | mākuliḥ po<lb n=" | ||
| + | kṛṣṇasarppeṇa gonasyāṃ< | ||
| + | vaiparītyena vā jātaḥ poṭagalaḥ | kṛ<lb n=" | ||
| + | vaiparītyena vā jātaḥ snigdharāji< | ||
| + | dvayor mmātṛvad ity eke | </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | sūkṣmanetrajihvāśirasaḥ striyaḥ | ubhayalakṣaṇā mandaceṣṭākrodhā napunsakā | ||
| + | iti |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | sāmānyata eva daṣṭalakṣaṇam upadekṣyāmaḥ | kiṃ kāraṇam viṣaṃ hi | ||
| + | < | ||
| + | > </ | ||
| + | upekṣitam āturam atipātayati | na cāvakā< | ||
| + | pratyekam api ca duṣṭalakṣaṇe ' | ||
| + | /> | ||
| + | āturahitam asammohe karañ cāsminn eva ca sarvvavyañjanāvarodha iti || </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | sandhivedanā śirogauravaṅ kaṭīpṛṣṭhagrīvādaurvvalyaṃ jṛmbhaṇaṃ svarāvasādaḥ | ||
| + | kharukharuko <lb n=" | ||
| + | ūrddhagamanaṃ< | ||
| + | srotrovarodhas tās tāś ca vātavedanā bhavanti |<lb n=" | ||
| + | tvaṅ< | ||
| + | > </ | ||
| + | śītābhilāṣaḥ paridhūpāyanan dāhas tṛṣṇā mado mūrcchā jvaraḥ śoṇitāgamanam | ||
| + | ūrddham adhaś ca māsāva< | ||
| + | ddaṃśakotho viparītadarśanam āturakopas tās tāś capittavedanā bhavanti || | ||
| + | rājīmadviṣeṇa tu tvaṅ< | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | stavdhatvaṃ gātrāṇām ādaṃśaśophaḥ sā< | ||
| + | khurukhurukaḥ | ucchvāsanirodhas tās tāś ca kaphavedanā bhavanti <lb n=" | ||
| + | || </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | napunsake< | ||
| + | sūtikayā kukṣiśūlārttaḥ sarudhiraṃ me<lb n=" | ||
| + | ākāṅkṣati | vṛddhena cirāt mandāś ca ve< | ||
| + | ca | nirvviṣeṇāviṣaliṅgaṃ | andhāhikenāndhatvam eke | gra<lb n=" | ||
| + | ajagaraḥ prāṇaharo na viṣād iti || </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tatra darvvīkarāṇām prathame vege viṣaṃ śoṇitaṃ dūṣayati | tatpra< | ||
| + | /> | ||
| + | i< | ||
| + | bhava< | ||
| + | tenātyarthakṛṣṇatā granthayaś ca bhavanti | tṛtīye medo dūṣayati< | ||
| + | /> | tena daṃśa< | ||
| + | caturthe koṣṭham anupraviśati || tataḥ kaphaprabhavān doṣān kopayati tena | ||
| + | tandrīkaphaprasekaḥ sandhiviśleṣa< | ||
| + | anupraviśati tena < | ||
| + | | ṣaṣṭhe majjānam anupraviśati | tena grahaṇīdoṣā gātragauravam atīsāro | ||
| + | hṛtpī< | ||
| + | vyānaṃ cātya< | ||
| + | tena śleṣmaprādurvbhāvaḥ kaṭī< | ||
| + | n=" | ||
| + | maṇḍalinān tu prathame vege viṣaḥ śoṇitan dūṣayati | tatpraduṣṭam pītatām | ||
| + | upaiti | tena pī<lb n=" | ||
| + | māṃsan dūṣaya< | ||
| + | cātyarthaparidāho daṃśaśvayathuś ca bhavati || tṛtīye medo dūṣayati |<lb | ||
| + | n=" | ||
| + | anupraviśya jvaram āpādayati | pañcame dāhaṃ sarvvagātreṣu karoti | | ||
| + | ṣaṣṭhasaptamayoḥ pūrvvavad iti || rājī< | ||
| + | prathame vege śoṇitan dūṣayati | tatpraduṣṭaṃ pāṇḍutām upaiti | tena | ||
| + | romaharṣaḥ pāṇḍvāvabhāsaś ca puruṣo bhavati | dvitīye māṃsan dūṣayati | tena | ||
| + | pāṇḍur atyartha< | ||
| + | daṃśakledo < | ||
| + | manyāstambhaśirogauravañ cāpādayati |<lb n=" | ||
| + | śītajvarañ ca ṣaṣṭhasaptamayoḥ pūrvvava< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | samparikīrttitāḥ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | bhinatti <add place=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | duḥkhitaḥ || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | > | ||
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| + | place=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | vege tu prathame pakṣī dhyāti muhyaty ataḥ paraṃ ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | /> | ||
| + | < | ||
| + | kecid ekaṃ vihaṃgeṣu viṣavegem uṣanti vai || | ||
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| + | | ||
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| + | <l ana=" | ||
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| + | |||
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| + | |||
| + | < | ||
| + | < | ||
| + | 54cd, 55, 58cd, 78cd, 79-83, 84cd, 85ab</ | ||
| + | < | ||
| + | < | ||
| + | --> | ||
| + | |||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | vyākhyāsyāmaḥ ||</ | ||
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| + | < | ||
| + | |||
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| + | < | ||
| + | <unclear reason=" | ||
| + | tu pūjitāḥ ||</ | ||
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| + | |||
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| + | < | ||
| + | sa pittaviṣavāhulyād daṃśo dā< | ||
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| + | < | ||
| + | sā tu rajvādibhir vvaddhā viṣa< | ||
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| + | |||
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| + | hito ' | ||
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| + | tāsu cāpi yathāyogam prati< | ||
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| + | < | ||
| + | | ||
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| + | |||
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| + | llepair vviṣaśeṣeṇa vāpi | | ||
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| + | | ||
| + | |||
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| + | | ||
| + | < | ||
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| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
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| + | vyavasye< | ||
| + | |||
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| + | dattam pramādāt || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | | </l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | jalaukābhiḥ śoṇitañ cāpahṛtvā || </l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kāryaḥ pittaviṣe tathaiva | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | place=" | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | vicūrṇṇitāni śṛṅge nidadhyāt madhusaṃyutāni | | ||
| + | < | ||
| + | eṣo 'gado hanti viṣam prayuktaḥ pānāñja< | ||
| + | > </ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | tathaiva ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | susūkṣmaḥ sacitrakakṣaudrayuto vidheyaḥ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | aji< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | kaṭuro< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > </ | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | viṣa< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | > </ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tvakkuṣṭha< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | āruṣkarajañ ca puṣpaṃ || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | <pb facs=" | ||
| + | sukṛto gṛhastho nāmnārṣabho nāma nararṣabhasya |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | caiva || | ||
| + | < | ||
| + | etena bheryaḥ paṭahāś ca digdhā nānadyamā< | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | sukhino bhavanti || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ca |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | ma< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | > </ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | eṣo gado jīvayatīha martyaḥ || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | piṣṭā samabhāgayuktāḥ |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | n=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | viṣāṇi ||</ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | n=" | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <p style=" | ||
| + | </ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <div n=" | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | | ||
| + | Additions 63.1 | ||
| + | Metre Break 62ab | ||
| + | --> | ||
| + | < | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | mūrcchā ca dāruṇāḥ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | mūṣikasaṃsthitaiḥ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | < | ||
| + | pived āragvadhādin tu vāntas tatrāśu mānavaḥ ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | grīvāstambha< | ||
| + | <l xml: | ||
| + | cātra dāpayet ||</ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | sāramāṣakān || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | pivet || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | ślakṣṇapiṣṭhāni dāpayet || | ||
| + | < | ||
| + | tat sarvvamekataḥ kṛtvā śanairmmṛdvagninā pacet |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | n=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | svara< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | bhiṣak | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | < | ||
| + | yena cāpi bhave< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | yadi trasyaty adaṣṭo pi < | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kīrttitaṃ | </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | sarppiṣā paridā< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | <!-- 59cd is given after 60 and given it above, id no. 60.1 --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kupyati tad viṣaṃ |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | prakupyatīti ||</ | ||
| + | </l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l style=" | ||
| + | /> | ||
| + | </ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <div n=" | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | < | ||
| + | adhyāya 5.7 in the MS | ||
| + | Missing verses 8, | ||
| + | Additions 19cd | ||
| + | --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | āhṛtya gavām mūtreṇa kṣārakalpena parisrāvya vipacet | <cb/> dadyāc cātra | ||
| + | pippalīmūla< | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | /> | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | > </ | ||
| + | āgatapākam avatārya lohakumbhe nidadhyāt ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | pra< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | dustare ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | māṣakāṃ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | gataṃ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | /> | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l style=" | ||
| + | ||</ | ||
| + | </ | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <div n=" | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | Notes from Harshal Bhatt Missing verses 7ab, 14ab, 18, 19, 20ab, 22, 23, 24, 25ab, 27, 28-37, 39, 40, 41, 43cd, 44cd, 45-56abcd, 57ab, 60ab, 62, 64ab, 65cd, 72ab, 92cd, 109cd, 116-119, 130, 131cd, 132, 133cd-136 | ||
| + | |||
| + | Additions 27.1-27.18, | ||
| + | 71.1-71.3 | ||
| + | 125.1, | ||
| + | 129.1, | ||
| + | 138ef, | ||
| + | 140.1-140.6, | ||
| + | 143.1-143.8, | ||
| + | |||
| + | Metre Break 70cd, 80cd | ||
| + | | ||
| + | Notes 67cd, 68, 69 are given after 71ab | ||
| + | --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | ma< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | smṛtaḥ || | ||
| + | < | ||
| + | ete hy agni prakṛtayaś ca< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kiṭibhoṭa< | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | cā</ | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | tair bbhavantī< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kiṭibhāni ca || </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | lower" unit=" | ||
| + | vāpi viṣākule |</l> | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tathā || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | fol 347 upper" unit=" | ||
| + | sudāruṇā || </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | tair ddaṣṭaḥ kaṇḍūsaṃyukto haritam mūrcchito vamet | </l> | ||
| + | |||
| + | <!-- jalauka --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <!-- viśvaṃbhara --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | dāhajvararujāpahāḥ || | ||
| + | < | ||
| + | tair ddaṣṭamātre śvaya< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <!-- pipīlika --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | granthāntare</ | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | tāpite || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <!-- inserted? --> | ||
| + | |||
| + | <!-- makṣika --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | < | ||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | tair ddaṣṭe roṣa< | ||
| + | unit=" | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <!-- to here not in K --> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | anyatra mūrcchitān |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | saṃśodhanāni ca ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | śa< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | < | ||
| + | | ||
| + | ||< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | kṛṣṇaraktāgamaś ca |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | place=" | ||
| + | ca</ | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | madhyaviṣābhidaṣṭe || | ||
| + | < | ||
| + | < | ||
| + | <pb n=" | ||
| + | śvetanīlodarau ca | </l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
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| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | vṛścikāḥ prāṇanāśāḥ |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | jvaradāhau bhramaś ca || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | > | ||
| + | />pram eva ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |< | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | > | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |</l> | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | śīghram vṛścikajam viṣaṃ || | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | lower" unit=" | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | vṛkṣaḥ | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | prathame 'hani syāt |< | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | 'hani kopam eti | | ||
| + | < | ||
| + | ato 'dhike hni prakaroti jantor vviṣaprakopaprabhavān vikārān ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | āvṛṇoti | | ||
| + | < | ||
| + | tat saptame< | ||
| + | atipravṛddhaṃ ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | nihanyuḥ | | ||
| + | < | ||
| + | ato ' | ||
| + | ||</ | ||
| + | |||
| + | <l xml: | ||
| + | vināśayanti | | ||
| + | < | ||
| + | | ||
| + | viṣaghāta< | ||
| + | > | ||
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